मत समझना-हो गया है राख का अधिकार,
मैं अभी अंगार हूँ, जलता हुआ अंगार!

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जीवन

पराधीन भारत के एक संभ्रांत सनातन वैष्णव परिवार में 8 अक्टूबर 1926 को श्री राम कुमार चतुर्वेदी का जन्म मुंगावली तहसील (वर्तमान जिला गुना म .प्र) में हुआ|

जीवन

पराधीन भारत के एक संभ्रांत सनातन वैष्णव परिवार में 8 अक्टूबर 1926 को श्री राम कुमार चतुर्वेदी का जन्म मुंगावली तहसील (वर्तमान जिला गुना म .प्र) में हुआ|

प्रारंभिक शिक्षा ग्वालियर के गोरखी विद्यालय में, उच्च शिक्षा जीवाजी राव इंटर कॉलेज और विक्टोरिया कॉलेज में हुई। यहीं से उन्होंने 1942 के आंदोलन से प्रेरित होकर कविता लेखन शुरू किया और राष्ट्रीय कवि सम्मेलनों में ख्याति पाई। आगे उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में एम.ए. किया और आगरा विश्वविद्यालय से हिंदी में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की।

कार्यक्षेत्र

मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग में सहायक प्राध्यापक, प्राध्यापक एवं प्राचार्य पद पर पदस्थ रहे ।

कार्यक्षेत्र

मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग में सहायक प्राध्यापक, प्राध्यापक एवं प्राचार्य पद पर पदस्थ रहे ।

विक्रम विश्वविद्यालय और जीवाजी विश्विद्यालय की अनेक समितियों के सदस्य रहे ।

रेलवे हिंदी भाषा समिति के सदस्य रहे ।

भारतीय राष्ट्रीय सांस्कृतिक निधि शिवपुरी (INTACH) के सहायक संयोजक रहे ।

प्रकाशित पुस्तकें

ग्वालियर जहां एक तरफ सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र था वहीं देश की बदलती राजनैतिक परिस्थिति की धड़कन भी यहां स्पष्ट सुनाई देती थी।

प्रकाशित पुस्तकें

ग्वालियर जहां एक तरफ सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र था वहीं देश की बदलती राजनैतिक परिस्थिति की धड़कन भी यहां स्पष्ट सुनाई देती थी।

  • 1. खून की होली
  • 2. प्रथम चरण
  • 3. हिंदुस्तान की आग
  • 4. घटा के घुंघरू
  • 5. धूल का परिचय
  • 6. नई पीढ़ी - नई राहें
  • 7. मौसम नही है
  • 8. उत्तर नही मिला
  • 9. शंख को टेरती बांसुरी
  • 10. हमारे लोक प्रिय गीतकार -राम कुमार चतुर्वेदी "चंचल"(संपादक शेरजंग गर्ग )

राम कुमार चतुर्वेदी “चंचल”की कवितायें

shankh ko terati bansuri book
शंख को टेरती बांसुरी
ghata ke ghunghru book
घटा के घुंघरू
dhool ka parichay book
धूल का परिचय
mausam nahin hai book
मौसम नहीं है
nayi peedhi nayi raahen book
नयी पीढ़ी नयी राहें
pratham charan book
प्रथम चरण
uttar nahin mila book
उत्तर नहीं मिला
hindustan ki aag book
हिन्दुस्तान की आग
hamare lokpriya geetkar book
हमारे लोकप्रिय गीतकार
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मत समझना-हो गया है राख का अधिकार, 
मैं अभी अंगार हूँ, जलता हुआ अंगार!

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अपनी ढिलमिल आशाओं को विश्वास बनाकर तो देखो!
बनते-बनते बन जाएगा, इतिहास बनाकर तो देखो!

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